श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.5.47 
না মিলিল যদি আসি’ তোমার দুযারে
তবে তুমি কি করিবা? বলহ আমারে”
ना मिलिल यदि आसि’ तोमार दुयारे
तबे तुमि कि करिबा? बलह आमारे”
 
 
अनुवाद
“मुझे बताओ, अगर तुम्हारे दरवाजे पर कुछ नहीं आता, तो तुम क्या करोगे?”
 
“Tell me, if nothing comes to your door, what will you do?”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd