श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.5.47 
না মিলিল যদি আসি’ তোমার দুযারে
তবে তুমি কি করিবা? বলহ আমারে”
ना मिलिल यदि आसि’ तोमार दुयारे
तबे तुमि कि करिबा? बलह आमारे”
 
 
अनुवाद
“मुझे बताओ, अगर तुम्हारे दरवाजे पर कुछ नहीं आता, तो तुम क्या करोगे?”
 
“Tell me, if nothing comes to your door, what will you do?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)