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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 469
श्लोक
3.5.469
তবে কত-দিনে আইলেন শান্তিপুরে
আচার্য-গোসাঞি প্রিয-বিগ্রহের ঘরে
तबे कत-दिने आइलेन शान्तिपुरे
आचार्य-गोसाञि प्रिय-विग्रहेर घरे
अनुवाद
फिर कुछ दिनों के बाद वे शांतिपुर में अपने प्रिय अद्वैत आचार्य के घर गए।
Then after a few days he went to the house of his beloved Advaita Acharya in Shantipur.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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