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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 468
श्लोक
3.5.468
এই মতে সপ্তগ্রামে, আম্বুযা-মুল্লুকে
বিহরেন নিত্যানন্দ-স্বরূপ কৌতুকে
एइ मते सप्तग्रामे, आम्बुया-मुल्लुके
विहरेन नित्यानन्द-स्वरूप कौतुके
अनुवाद
इस तरह नित्यानंद स्वरूप ने सप्तग्राम और अंबुया-मुल्लुका में खुशी से लीलाओं का आनंद लिया।
In this way Nityananda Svarupa happily enjoyed the pastimes at Saptagram and Ambuya-Muluka.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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