|
| |
| |
श्लोक 3.5.468  |
এই মতে সপ্তগ্রামে, আম্বুযা-মুল্লুকে
বিহরেন নিত্যানন্দ-স্বরূপ কৌতুকে |
एइ मते सप्तग्रामे, आम्बुया-मुल्लुके
विहरेन नित्यानन्द-स्वरूप कौतुके |
| |
| |
| अनुवाद |
| इस तरह नित्यानंद स्वरूप ने सप्तग्राम और अंबुया-मुल्लुका में खुशी से लीलाओं का आनंद लिया। |
| |
| In this way Nityananda Svarupa happily enjoyed the pastimes at Saptagram and Ambuya-Muluka. |
| ✨ ai-generated |
| |
|