श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 467
 
 
श्लोक  3.5.467 
জয জয অবধূত-চন্দ্র মহাশয
যাঙ্হার কৃপায হেন সব রঙ্গ হয
जय जय अवधूत-चन्द्र महाशय
याङ्हार कृपाय हेन सब रङ्ग हय
 
 
अनुवाद
अवधूतचन्द्र महाशय की जय हो, जिनकी कृपा से ये सभी लीलाएँ सम्पन्न हुईं।
 
All glory to Avadhootchandra Mahashay, by whose grace all these Leelas were accomplished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)