श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 464
 
 
श्लोक  3.5.464 
নিত্যানন্দ-স্বরূপের আবেশ দেখিতে
হেন নাহি যে বিহ্বল না হয জগতে
नित्यानन्द-स्वरूपेर आवेश देखिते
हेन नाहि ये विह्वल ना हय जगते
 
 
अनुवाद
संसार में ऐसा कोई नहीं था जो नित्यानन्द स्वरूप की परमानंदमयी मनोदशा को देखकर अभिभूत न हुआ हो।
 
There was no one in the world who was not overwhelmed by seeing the blissful state of mind of Nityananda Swarup.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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