श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 463
 
 
श्लोक  3.5.463 
প্রতি-ঘরে ঘরে প্রতি-নগরে চত্বরে
নিত্যানন্দ প্রভুবর কীর্তনে বিহরে
प्रति-घरे घरे प्रति-नगरे चत्वरे
नित्यानन्द प्रभुवर कीर्तने विहरे
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु ने हर घर, हर मोहल्ले और हर गाँव में कीर्तन लीला का आनंद लिया।
 
Nityananda Prabhu enjoyed the Kirtan Leela in every home, every neighborhood and every village.
तात्पर्य
शब्द 'चतुर्वार' एक पड़ोस या पार्क को दर्शाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)