श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 460
 
 
श्लोक  3.5.460 
সপ্তগ্রামে যত হৈল কীর্তন-বিহার
শত-বত্সরে ও তাহা নারি বর্ণিবার
सप्तग्रामे यत हैल कीर्तन-विहार
शत-वत्सरे ओ ताहा नारि वर्णिबार
 
 
अनुवाद
सप्तग्राम में जो कीर्तन लीलाएँ हुईं, उनका वर्णन सौ वर्षों में भी नहीं किया जा सकता।
 
The Kirtan Leelas that took place in Saptagram cannot be described even in a hundred years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)