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श्लोक 3.5.456  |
বণিক্-সকল নিত্যানন্দের চরণ
সর্ব-ভাবে ভজিলেন লৈযাশরণ |
वणिक्-सकल नित्यानन्देर चरण
सर्व-भावे भजिलेन लैयाशरण |
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| अनुवाद |
| सभी व्यापारियों ने नित्यानंद के चरणकमलों की शरण ली और उनकी सभी प्रकार से पूजा की। |
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| All the merchants took refuge at the lotus feet of Nityananda and worshipped him in all possible ways. |
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