श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 456
 
 
श्लोक  3.5.456 
বণিক্-সকল নিত্যানন্দের চরণ
সর্ব-ভাবে ভজিলেন লৈযাশরণ
वणिक्-सकल नित्यानन्देर चरण
सर्व-भावे भजिलेन लैयाशरण
 
 
अनुवाद
सभी व्यापारियों ने नित्यानंद के चरणकमलों की शरण ली और उनकी सभी प्रकार से पूजा की।
 
All the merchants took refuge at the lotus feet of Nityananda and worshipped him in all possible ways.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)