श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 455
 
 
श्लोक  3.5.455 
সপ্তগ্রামে সব বণিকের ঘরে ঘরে
আপনে নিতাইচাঙ্দ কীর্তনে বিহরে
सप्तग्रामे सब वणिकेर घरे घरे
आपने निताइचाङ्द कीर्तने विहरे
 
 
अनुवाद
निताई चन्द्र स्वयं सप्तग्राम के सभी व्यापारियों के घरों में कीर्तन का आनंद लेते थे।
 
Nitai Chandra himself used to enjoy kirtan in the houses of all the merchants of Saptagram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)