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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 450
श्लोक
3.5.450
কায-মনো-বাক্যে নিত্যানন্দের চরণ
ভজিলেন অকৈতবে দত্ত-উদ্ধারণ
काय-मनो-वाक्ये नित्यानन्देर चरण
भजिलेन अकैतवे दत्त-उद्धारण
अनुवाद
उद्धारण दत्त ने तन, मन और वाणी से नित्यानंद के चरणों की सच्चे मन से पूजा की।
Uddharana Dutta sincerely worshipped the feet of Nityananda with his body, mind and words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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