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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 45
श्लोक
3.5.45
কে-মতে করিবা পরিবারের পোষণ
কিছুই না বুঝি মুঞি তোমার বচন
के-मते करिबा परिवारेर पोषण
किछुइ ना बुझि मुञि तोमार वचन
अनुवाद
"फिर तुम अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करोगे? मुझे समझ नहीं आ रहा कि तुम क्या कह रही हो।"
"Then how are you going to support your family? I don't understand what you're saying."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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