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श्लोक 3.5.440  |
সেহ ছার বলায ’চৈতন্য-দাস’ নাম
পাপী কেমনে যায অদ্বৈতের স্থান |
सेह छार बलाय ’चैतन्य-दास’ नाम
पापी केमने याय अद्वैतेर स्थान |
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| अनुवाद |
| ऐसा कोई निकम्मा व्यक्ति अपने को चैतन्यदास कह सकता है, परन्तु ऐसा पापी व्यक्ति अद्वैत की शरण कैसे प्राप्त कर सकता है? |
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| Such a worthless person may call himself Chaitanyadas, but how can such a sinful person take refuge in Advaita? |
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