श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 439
 
 
श्लोक  3.5.439 
সাধু-লোকে অদ্বৈতের এ মহিমা ঘোষে
কেহ ইহা অদ্বৈতের নিন্দা হেন বাসে
साधु-लोके अद्वैतेर ए महिमा घोषे
केह इहा अद्वैतेर निन्दा हेन वासे
 
 
अनुवाद
संत पुरुष सदैव इसी प्रकार अद्वैत का महिमामंडन करते हैं, किन्तु कुछ लोग इसे अद्वैत का अपमान मानते हैं।
 
Saints always glorify Advaita in this manner, but some people consider it an insult to Advaita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)