श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 438
 
 
श्लोक  3.5.438 
জয জয অদ্বৈতের যে চৈতন্য-ভক্তি
যাঙ্হার প্রসাদে অদ্বৈতের সর্ব-শক্তি
जय जय अद्वैतेर ये चैतन्य-भक्ति
याङ्हार प्रसादे अद्वैतेर सर्व-शक्ति
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य के प्रति अद्वैत की भक्ति की जय हो! भगवान चैतन्य की कृपा से अद्वैत पूर्णतः सशक्त हो गया।
 
Victory to Advaita's devotion to Lord Caitanya! Advaita became fully empowered by the grace of Lord Caitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)