দুই তিন দিন মজ্জি’ জলের ভিতরে
থাকেন, কখনো দুঃখ না হয শরীরে
दुइ तिन दिन मज्जि’ जलेर भितरे
थाकेन, कखनो दुःख ना हय शरीरे
अनुवाद
कभी-कभी वह दो या तीन दिन तक पानी में डूबा रहता, लेकिन उसे कोई शारीरिक असुविधा महसूस नहीं होती।
Sometimes he would remain submerged in water for two or three days, but he would not feel any physical discomfort.
तात्पर्य
जलजीव तो प्रकृति से ही पानी में रहते हैं।थलजीव बहुत समय तक जल में नहीं रह पाते।श्री चैतन्य दास अत्यंत सहज भाव से पत्थर की तरह पानी में रहते थे।उनकी चेतना में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हुआ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥