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श्लोक 3.5.425  |
পুরন্দর-পণ্ডিতের পরম উন্মাদ
বৃক্ষের উপরে চডি’ করে সিṁহ-নাদ |
पुरन्दर-पण्डितेर परम उन्माद
वृक्षेर उपरे चडि’ करे सिꣳह-नाद |
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| अनुवाद |
| पुरंदर पंडित प्रेम के नशे में इतने मग्न हो गए कि वे एक पेड़ पर चढ़ गए और शेर की तरह दहाड़ने लगे। |
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| Purandara Pandit became so intoxicated with love that he climbed a tree and roared like a lion. |
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