श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 422
 
 
श्लोक  3.5.422 
শুভ-যাত্রা করিলেন নবদ্বীপ-প্রতি
পারিষদ-গণ সব করিযা সṁহতি
शुभ-यात्रा करिलेन नवद्वीप-प्रति
पारिषद-गण सब करिया सꣳहति
 
 
अनुवाद
अतः उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ नवद्वीप की शुभ यात्रा प्रारम्भ की।
 
So he started his auspicious journey to Navadvipa with his companions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)