श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 412
 
 
श्लोक  3.5.412 
কত-ক্ষণে আইলেন আপন-মন্দিরে
নিত্যানন্দ-অধিষ্ঠান যাঙ্হার শরীরে
कत-क्षणे आइलेन आपन-मन्दिरे
नित्यानन्द-अधिष्ठान याङ्हार शरीरे
 
 
अनुवाद
कुछ समय बाद गदाधर अपने घर लौट आए। नित्यानंद सदैव उनके शरीर में निवास करते रहे।
 
After some time, Gadadhara returned home. Nityananda continued to reside in his body forever.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)