| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 3: अंत्य-खण्ड » अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ » श्लोक 402 |
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| | | | श्लोक 3.5.402  | কাজী বলে,—“গদাধর, তুমি কেনে এথা?”
গদাধর বলেন,—“আছযে কিছু কথা | काजी बले,—“गदाधर, तुमि केने एथा?”
गदाधर बलेन,—“आछये किछु कथा | | | | | | अनुवाद | | काजी ने पूछा, “गदाधर, तुम यहाँ क्यों हो?” गदाधर ने उत्तर दिया, “मुझे कुछ कहना है। | | | | The Qazi asked, “Gadadhar, why are you here?” Gadadhara replied, “I have something to say. | | ✨ ai-generated | | |
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