श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 401
 
 
श्लोक  3.5.401 
অগ্নি-হেন ক্রোধে কাজী হৈলা বাহির
গদাধর দাস দেখি’ মাত্র হৈলা স্থির
अग्नि-हेन क्रोधे काजी हैला बाहिर
गदाधर दास देखि’ मात्र हैला स्थिर
 
 
अनुवाद
काजी जब कमरे से बाहर आया तो वह आग की तरह क्रोधित था, लेकिन गदाधर दास को देखकर वह शांत हो गया।
 
When the Qazi came out of the room he was furious like fire, but on seeing Gadadhara Das he calmed down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)