श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.5.40 
শ্রীবাস বলেন,—“প্রভু কোথাও যাইতে
না লয আমার চিত্ত কহিনু তোমাতে”
श्रीवास बलेन,—“प्रभु कोथाओ याइते
ना लय आमार चित्त कहिनु तोमाते”
 
 
अनुवाद
श्रीवास ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, मैं आपसे कहता हूँ कि मुझे कहीं जाना पसंद नहीं है।”
 
Srivasa replied, “O Lord, I tell you that I do not like to go anywhere.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)