श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 397
 
 
श्लोक  3.5.397 
যে কাজীর ভযে লোক পলায অন্তরে
নির্ভযে চলিলা নিশা-ভাগে তার ঘরে
ये काजीर भये लोक पलाय अन्तरे
निर्भये चलिला निशा-भागे तार घरे
 
 
अनुवाद
यद्यपि लोग प्रायः उस काजी के भय से भाग जाते थे, किन्तु गदाधर निडर होकर रात्रि में अपने घर चला जाता था।
 
Although people often ran away from the fear of that Qazi, Gadhdhar would fearlessly go to his home at night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)