श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 395
 
 
श्लोक  3.5.395 
সেই গ্রামে কাজীআছে পরম দুর্বার
কীর্তনের প্রতি দ্বেষ করযে অপার
सेइ ग्रामे काजीआछे परम दुर्बार
कीर्तनेर प्रति द्वेष करये अपार
 
 
अनुवाद
उस गाँव में एक बहुत ही पापी काजी रहता था। वह कीर्तन करने का कड़ा विरोध करता था।
 
There lived a very sinful Qazi in that village. He was strongly opposed to kirtan.
तात्पर्य
एंडियाडाह गाँव में एक बहुत ही शक्तिशाली काजी रहता था, जो धार्मिक सिद्धांतों का बहुत विरोधी था और हरी के सामूहिक महिमामंडन का कड़ा विरोध करता था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)