श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 388
 
 
श्लोक  3.5.388 
হেন সে করেন কৃপা-দৃষ্টি অতিশয
পরানন্দে দেহ-স্মৃতি কার না থাকয
हेन से करेन कृपा-दृष्टि अतिशय
परानन्दे देह-स्मृति कार ना थाकय
 
 
अनुवाद
उनकी दृष्टि ऐसी दया से भरी थी कि सभी लोग आनंद में अपने शरीर को भूल गये।
 
His gaze was so full of compassion that everyone forgot their bodies in joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)