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श्लोक 3.5.387  |
যে-দিকে চাহেন নিত্যানন্দ প্রেম-রসে
সেই-দিকে স্ত্রী-পুরুষে কৃষ্ণ-রসে ভাসে |
ये-दिके चाहेन नित्यानन्द प्रेम-रसे
सेइ-दिके स्त्री-पुरुषे कृष्ण-रसे भासे |
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| अनुवाद |
| नित्यानन्द ने जिस दिशा में भी अपनी प्रेम भरी दृष्टि डाली, सभी नर-नारी कृष्ण के प्रेम में मग्न हो गये। |
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| In whichever direction Nityananda cast his loving gaze, all men and women became immersed in the love of Krishna. |
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