श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 385
 
 
श्लोक  3.5.385 
কি বা সে নযন-ভঙ্গী, কি সুন্দর হাস
কিবা সে অদ্ভুত শির-কম্পন-বিলাস
कि वा से नयन-भङ्गी, कि सुन्दर हास
किबा से अद्भुत शिर-कम्पन-विलास
 
 
अनुवाद
उसकी आँखों की गति कितनी अद्भुत थी, उसकी मुस्कान कितनी सुंदर थी, और उसके सिर का हिलना कितना अद्भुत था!
 
How wonderful were the movements of his eyes, how beautiful was his smile, and how wonderful were the movements of his head!
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd