श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 384
 
 
श्लोक  3.5.384 
বিদ্যুতের প্রায নৃত্য গতির ভঙ্গি
মাকিবা সে অদ্ভুত ভুজ-চালন-মহিমা
विद्युतेर प्राय नृत्य गतिर भङ्गि
माकिबा से अद्भुत भुज-चालन-महिमा
 
 
अनुवाद
जब वे नाच रहे थे, तो उनके शरीर के अंगों की गति बिजली की तरह चमक रही थी। उनकी भुजाओं की गति कितनी अद्भुत थी!
 
As they danced, their body parts moved like lightning. How amazing were the movements of their arms!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)