श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 383
 
 
श्लोक  3.5.383 
প্রেম-ভক্তি-বিকারের যত আছে নাম
সব প্রকাশিযা নৃত্য করে অনুপাম
प्रेम-भक्ति-विकारेर यत आछे नाम
सब प्रकाशिया नृत्य करे अनुपाम
 
 
अनुवाद
उन्होंने अतुलनीय नृत्य करते हुए परमानंद प्रेम के सभी रूपांतरण प्रदर्शित किये।
 
They danced incomparably, displaying all the transformations of ecstatic love.
तात्पर्य
आठ प्रकार के सात्विक-भाव, या आध्यात्मिक लक्षण, और तैंतीस प्रकार के संचारी-भाव, या निरंतर विद्यमान आनंद के लक्षण हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)