श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 380
 
 
श्लोक  3.5.380 
এই-রূপ লীলা তান নিজ-প্রেম-রঙ্গে
সুকৃতি শ্রী-গদাধর দাস করি’ সঙ্গে
एइ-रूप लीला तान निज-प्रेम-रङ्गे
सुकृति श्री-गदाधर दास करि’ सङ्गे
 
 
अनुवाद
अपने परमानंद प्रेम की प्रसन्नता में, नित्यानंद ने भाग्यशाली श्री गदाधर दास के साथ ऐसी लीलाओं का आनंद लिया।
 
In the delight of His ecstatic love, Nityananda enjoyed such pastimes with the fortunate Sri Gadadhara Das.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)