श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 378
 
 
श्लोक  3.5.378 
দান-খণ্ড গাযেন মাধবানন্দ ঘোষ
শুনি’ অবধূত-সিṁহ পরম সন্তোষ
दान-खण्ड गायेन माधवानन्द घोष
शुनि’ अवधूत-सिꣳह परम सन्तोष
 
 
अनुवाद
तब माधवानन्द घोष ने दान-लीला का गान किया और सिंहतुल्य अवधूत अत्यन्त संतुष्ट हो गये।
 
Then Madhavanand Ghosh sang the tale of charity and the lion-like Avadhoot became very satisfied.
तात्पर्य
दाना-खंड-गान वाक्यांश कृष्ण की दाना-लीला या कर लगाने के मनोरंजन का वर्णन करने वाले गीत को संदर्भित करता है, जिसे [रूप गोस्वामी] दाना-केली-कौमुदी में विस्तृत रूप से वर्णित किया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)