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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 366
श्लोक
3.5.366
এই-মত নিত্যানন্দ—বালক-জীবন
বিহ্বল করিতে লাগিলেন শিশু-গণ
एइ-मत नित्यानन्द—बालक-जीवन
विह्वल करिते लागिलेन शिशु-गण
अनुवाद
इस प्रकार नित्यानंद, जो सभी बालकों के प्राण और आत्मा हैं, उन बालकों को परमानंदमय प्रेम से अभिभूत कर देते थे।
Thus Nityananda, who is the life and soul of all children, overwhelmed them with ecstatic love.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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