श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 363
 
 
श्लोक  3.5.363 
হুঙ্কার করিযা বৃক্ষ ফেলে উপাডিযা
“মুঞিরে গোপাল” বলি’ বেডায ধাইযা
हुङ्कार करिया वृक्ष फेले उपाडिया
“मुञिरे गोपाल” बलि’ वेडाय धाइया
 
 
अनुवाद
वे जोर से दहाड़ते, पेड़ उखाड़ते और यह कहते हुए इधर-उधर दौड़ते कि, “मैं एक ग्वाला हूँ।”
 
He would roar loudly, uproot trees and run around saying, “I am a cowherd.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)