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श्लोक 3.5.363  |
হুঙ্কার করিযা বৃক্ষ ফেলে উপাডিযা
“মুঞিরে গোপাল” বলি’ বেডায ধাইযা |
हुङ्कार करिया वृक्ष फेले उपाडिया
“मुञिरे गोपाल” बलि’ वेडाय धाइया |
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| अनुवाद |
| वे जोर से दहाड़ते, पेड़ उखाड़ते और यह कहते हुए इधर-उधर दौड़ते कि, “मैं एक ग्वाला हूँ।” |
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| He would roar loudly, uproot trees and run around saying, “I am a cowherd.” |
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