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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 356
श्लोक
3.5.356
জাহ্নবীর দুই কূলে যত আছে গ্রাম
সর্বত্র ভ্রমেন নিত্যানন্দ জ্যোতির্-ধাম
जाह्नवीर दुइ कूले यत आछे ग्राम
सर्वत्र भ्रमेन नित्यानन्द ज्योतिर्-धाम
अनुवाद
परम तेजस्वी नित्यानंद ने गंगा के दोनों तटों पर स्थित प्रत्येक गाँव का दौरा किया।
The most brilliant Nityananda visited every village situated on both banks of the Ganga.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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