vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 354
श्लोक
3.5.354
এই মত নিত্যানন্দ স্বানুভাব-রঙ্গে
বিহরেন সকল পার্ষদ করি’ সঙ্গে
एइ मत नित्यानन्द स्वानुभाव-रङ्गे
विहरेन सकल पार्षद करि’ सङ्गे
अनुवाद
इस प्रकार नित्यानंद अपने सहयोगियों के साथ क्रीड़ा करते हुए आनंदित होते थे।
Thus Nityananda enjoyed playing with his associates.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×