श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 354
 
 
श्लोक  3.5.354 
এই মত নিত্যানন্দ স্বানুভাব-রঙ্গে
বিহরেন সকল পার্ষদ করি’ সঙ্গে
एइ मत नित्यानन्द स्वानुभाव-रङ्गे
विहरेन सकल पार्षद करि’ सङ्गे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार नित्यानंद अपने सहयोगियों के साथ क्रीड़ा करते हुए आनंदित होते थे।
 
Thus Nityananda enjoyed playing with his associates.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)