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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 349
श्लोक
3.5.349
যে-দিকে চাহেন দুই-কমল-নযনে
সেই-দিকে প্রেম-বর্ষে, ভাসে সর্ব-জনে
ये-दिके चाहेन दुइ-कमल-नयने
सेइ-दिके प्रेम-वर्षे, भासे सर्व-जने
अनुवाद
जिस ओर भी उनके कमल-नेत्र दृष्टिपात करते, वहाँ आनंदमय प्रेम की वर्षा होती और सभी लोग उसमें डूब जाते।
Wherever His lotus eyes looked, there would be a shower of blissful love and everyone would be immersed in it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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