श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 345
 
 
श्लोक  3.5.345 
মালতী, মল্লিকা, যূথী, চম্পকের মালা
শ্রী-বক্ষে করযে শোভা আন্দোলন-খেলা
मालती, मल्लिका, यूथी, चम्पकेर माला
श्री-वक्षे करये शोभा आन्दोलन-खेला
 
 
अनुवाद
मालती, मल्लिका, युति और चम्पक की पुष्प मालाएँ उनके आकर्षक वक्षस्थल पर झूल रही थीं।
 
Garlands of Malati, Mallika, Yuti and Champaka flowers were hanging on her attractive chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)