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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 340
श्लोक
3.5.340
কন্ঠ শোভা করে বহু-বিধ দিব্য হার
মণি-মূক্তা-প্রবালাদি-যত সর্ব-সার
कन्ठ शोभा करे बहु-विध दिव्य हार
मणि-मूक्ता-प्रबालादि-यत सर्व-सार
अनुवाद
उन्होंने अपने गले को हीरे, मोती और मूंगे से बने अनेक प्रकार के सुन्दर हारों से सजाया।
He adorned his neck with a variety of beautiful necklaces made of diamonds, pearls and corals.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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