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श्लोक 3.5.340  |
কন্ঠ শোভা করে বহু-বিধ দিব্য হার
মণি-মূক্তা-প্রবালাদি-যত সর্ব-সার |
कन्ठ शोभा करे बहु-विध दिव्य हार
मणि-मूक्ता-प्रबालादि-यत सर्व-सार |
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| अनुवाद |
| उन्होंने अपने गले को हीरे, मोती और मूंगे से बने अनेक प्रकार के सुन्दर हारों से सजाया। |
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| He adorned his neck with a variety of beautiful necklaces made of diamonds, pearls and corals. |
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