श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 338
 
 
श्लोक  3.5.338 
দুই হস্তে সুবর্ণের অঙ্গদ বলয
পুষ্ট করি’ পরিলেন আত্ম-ইচ্ছা-ময
दुइ हस्ते सुवर्णेर अङ्गद बलय
पुष्ट करि’ परिलेन आत्म-इच्छा-मय
 
 
अनुवाद
अपनी इच्छानुसार उन्होंने अपनी दोनों कलाइयों और भुजाओं को सोने के कंगन और बाजूबंदों से सजाया।
 
As per his wish, he decorated both his wrists and arms with gold bracelets and armlets.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)