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श्लोक 3.5.334  |
ইচ্ছা মাত্র সর্ব-অলঙ্কার সেই ক্ষণে
উপসন্ন আসিযা হৈল বিদ্যমানে |
इच्छा मात्र सर्व-अलङ्कार सेइ क्षणे
उपसन्न आसिया हैल विद्यमाने |
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| अनुवाद |
| जैसे ही उनमें वह इच्छा जागृत हुई, वहाँ सभी प्रकार के आभूषण प्रकट हो गये। |
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| As soon as that desire arose in him, all kinds of ornaments appeared there. |
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