vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 333
श्लोक
3.5.333
তবে নিত্যানন্দ প্রভুবর কত দিনে
অলঙ্কার পরিতে হৈলা ইচ্ছা মনে
तबे नित्यानन्द प्रभुवर कत दिने
अलङ्कार परिते हैला इच्छा मने
अनुवाद
कुछ दिनों के बाद नित्यानंद प्रभु ने स्वयं को कुछ आभूषणों से सजाने की इच्छा व्यक्त की।
After a few days, Nityananda Prabhu expressed his desire to adorn himself with some ornaments.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×