श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 326
 
 
श्लोक  3.5.326 
একো সেবকের নৃত্যে হেন রঙ্গ হয
চতুর্-দিকে দেখি যেন প্রেম-বন্যা-ময
एको सेवकेर नृत्ये हेन रङ्ग हय
चतुर्-दिके देखि येन प्रेम-वन्या-मय
 
 
अनुवाद
प्रत्येक भक्त का नृत्य इतना उत्कृष्ट था कि चारों दिशाएं प्रेम की लहर से भर गईं।
 
The dance of each devotee was so exquisite that all four directions were filled with waves of love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)