श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 322
 
 
श्लोक  3.5.322 
পানিহাটী-গ্রামে যত হৈল প্রেম-সুখ
চারি বেদে বর্ণিবেক সে সব কৌতুক
पानिहाटी-ग्रामे यत हैल प्रेम-सुख
चारि वेदे वर्णिबेक से सब कौतुक
 
 
अनुवाद
पनिहाटी गांव में प्रकट होने वाले परमानंद प्रेम के सुख का वर्णन चारों वेदों में किया जाएगा।
 
The bliss of ecstatic love that manifested in Panihati village will be described in all four Vedas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)