श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 314
 
 
श्लोक  3.5.314 
যাহারে চাহেন, সে-ই প্রেমে মূর্চ্ছা পায
বস্ত্র না সম্বরে, ভূমে পডি’ গডি’ যায
याहारे चाहेन, से-इ प्रेमे मूर्च्छा पाय
वस्त्र ना सम्वरे, भूमे पडि’ गडि’ याय
 
 
अनुवाद
जिस किसी पर भी वे दृष्टि डालते, वह प्रेमोन्मत्त होकर बेहोश हो जाता और अपना वस्त्र भूलकर भूमि पर लोटने लगता।
 
Whoever he looked at would become intoxicated with love and would faint and start rolling on the ground, forgetting his clothes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)