श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.5.31 
বাসুদেব দত্তেরে প্রভুর কৃপাশুনি’
আনন্দে বৈষ্ণব-গণ করে হরি-ধ্বনি
वासुदेव दत्तेरे प्रभुर कृपाशुनि’
आनन्दे वैष्णव-गण करे हरि-ध्वनि
 
 
अनुवाद
जब वैष्णवों ने वासुदेव दत्त के विषय में भगवान के दयालु वचन सुने, तो उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक हरि नाम का कीर्तन किया।
 
When the Vaishnavas heard the Lord's kind words about Vasudeva Datta, they happily chanted the name Hari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)