श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 309
 
 
श्लोक  3.5.309 
হেন সে দেহেতে জন্মিযাছে প্রেম-বল
তৃণ-প্রায উপাডিযা ফেলায সকল
हेन से देहेते जन्मियाछे प्रेम-बल
तृण-प्राय उपाडिया फेलाय सकल
 
 
अनुवाद
उसका शरीर इतने शक्तिशाली परमानंद प्रेम से भर गया कि उसने उन पेड़ों को ऐसे उखाड़ दिया मानो वे घास के पत्ते हों।
 
His body was filled with such powerful ecstatic love that he uprooted those trees as if they were blades of grass.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)