श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 308
 
 
श्लोक  3.5.308 
কেহ বা গুবাক-বনে যায রড দিযা
গাছ-পাঞ্চ-সাত-গুযা একত্র করিযা
केह वा गुवाक-वने याय रड दिया
गाछ-पाञ्च-सात-गुया एकत्र करिया
 
 
अनुवाद
कोई व्यक्ति सुपारी के जंगल में भाग गया, पांच-सात पेड़ तोड़ डाले और उन्हें एक साथ उखाड़ दिया।
 
Someone ran into the betel nut forest, broke five or seven trees and uprooted them all at once.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)