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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 307
श्लोक
3.5.307
কেহ বা হুঙ্কার করে বৃক্ষ-মূল ধরি’
উপাডিযা ফেলে বৃক্ষ বলি’ ’হরি হরি’
केह वा हुङ्कार करे वृक्ष-मूल धरि’
उपाडिया फेले वृक्ष बलि’ ’हरि हरि’
अनुवाद
किसी ने जोर से दहाड़ते हुए एक पेड़ की जड़ पकड़ ली और हरि का नाम लेते हुए उसे उखाड़ दिया।
Someone, roaring loudly, caught hold of the root of a tree and uprooted it while chanting the name of Hari.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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