श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 299
 
 
श्लोक  3.5.299 
নিরবধি শ্রী-কৃষ্ণ-চৈতন্যচন্দ্র-যশে
সবার শরীর পূর্ণ হৌ প্রেম-রসে”
निरवधि श्री-कृष्ण-चैतन्यचन्द्र-यशे
सबार शरीर पूर्ण हौ प्रेम-रसे”
 
 
अनुवाद
“आप सभी निरंतर श्री कृष्ण चैतन्य चन्द्र का गुणगान करते हुए परमानंद प्रेम की मधुरता से भर जाएँ।”
 
“May you all be filled with the sweetness of ecstatic love by constantly singing the praises of Sri Krishna Chaitanya Chandra.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)