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श्लोक 3.5.294  |
চৈতন্য-গোসাঞি আজি শুনিতে কীর্তন
নীলাচল হৈতে করিলেন আগমন |
चैतन्य-गोसाञि आजि शुनिते कीर्तन
नीलाचल हैते करिलेन आगमन |
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| अनुवाद |
| “भगवान चैतन्य आज नीलचल से कीर्तन सुनने आये हैं। |
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| “Lord Chaitanya has come from Nilachal today to listen to kirtan. |
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