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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 290
श्लोक
3.5.290
হাসি’ নিত্যানন্দ বলে,—“আরে ভাই সব!
বল দেখি কি গন্ধের পাও অনুভব?”
हासि’ नित्यानन्द बले,—“आरे भाइ सब!
बल देखि कि गन्धेर पाओ अनुभव?”
अनुवाद
नित्यानंद मुस्कुराये और बोले, “हे भाइयों, मुझे बताओ, क्या तुम्हें कुछ गंध आ रही है?”
Nityananda smiled and said, “O brothers, tell me, do you smell anything?”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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